वो नन्हा सा इक पल जाने
कैसे छल गया मुझको
लाख बचाया लाख सम्हाला 
बेकल कर दिया मुझको
पल पल छलती जाये आस
बुलाये हर पल मुझको
ऐसी कोई शाम ढले कल
और ले आये तुझको
तु हो साथ मेरे बस और
क्या लेना मुझको
महकी सी ये हवा बहके
मैं पा जाऊं तुझको

-आभा चन्द्रा

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