नसीब इन्सान का चाहत से ही सँवरता है
क्या बुरा इसमें किसी पर जो कोई मरता है
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हाल-ए-दिल ना पूछ भरी महफ़िल में कि उदास क्यों हूँ,  
भरी महफ़िल में तेरी बेवफाई का किस्सा हमसे सुना़या नही जाऐगा.

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रात भर जलता रहा यह दिल उसी की याद में,
समझ नहीं आता दर्द प्यार करने से होता है याद करने से.

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हर वक़्त मेरी खोज में रहती है तेरी याद,
तूने तो मेरे वजूद की तन्हाई भी छीन ली.

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अजब हाल है आदमी की शख्शियत का,..
हवस खुद की उठती है तवायफ उसको कहता है.

 

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