तुम्हारे जिस्म की खुशबू गुलों से आती है
ख़बर तुम्हारी भी अब दूसरों से आती है

हमीं अकेले नहीं जागते हैं रातों में
उसे भी नींद बड़ी मुश्किलों से आती है

हमारी आँखों को मैला तो कर दिया लेकिन
मुहब्बतों में चमक आंसुओं से आती है

इसीलिए तो अँधेरे हसीन लगते हैं
कि रात मिल के तेरे गेसुओं से आती हैं

ये किस मक़ाम में पहुंचा दिया मुहब्बत ने
कि तेरी याद भी अब कोशिशों से आती है….

-मुनव्वर राना

Facebook Comment

Internal Comment

Leave a Reply