मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो !
मैं तुम्हारे लिए, उम्र भर तक चला,तुम भी मेरे लिए सात पग तो चलो..!

दीपकों की तरह रोज़ जब मैं जला,तब तुम्हारे भवन में दिवाली हुई, 
जगमगाता,तुम्हारे लिए रथ बना,किन्तु मेरी हर एक रात काली हुई..!

मैंने तुमको नयन-नीर सागर दिया,तुम भी मेरे लिए अँजुरी भर तो दो !
मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो..!

जब भी मौसम ने बाँटी बहारें,तुम्हें,फूल सौंपे,मुझे शूल-शँकित किया
प्रीत की रीत की,लांछना जब बँटी,तुम अलग हो गये,मैं ही पंकित किया,

मैंने हर गीत गया,तुम्हारे लिए,तुम भी मेरे लिए.क्षीण-सा स्वर तो दो !
मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो..!

कोई अल्हड़ हवा जब चली झूमती,मन को ऐसा लगा ज्यों तुम्हीं से मिला ,
जब भी तुम मिल गये,राह में मोड़ पर,मुझको मालूम हुआ ज़िन्दगी से मिला,

साथ आना न आना,ये तुम सोचना,किन्तु मेरे लिए वायदा कर तो दो !
मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो..!

-कुमार विश्वास

Tum Bhi Mere Liye Raat Bhar To Jalo – Kumar Viswas Poetry

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