किसे सुनाएँ अपने गम के चन्द पन्नो के किस्से,
यहाँ तो हर शक्स भरी किताब लिए बैठा है…

मिटा दे उसकी तस्वीर मेरी आँखों से ऐ खुदा,
अब तो वो मुझे ख्वाबों में भी अच्छी नही लगती…

काफिर के दिल से आया हूँ मैं ये देखकर,
खुदा मौजूद है वहाँ पर उसे पता नहीं…

बे-खुदी बे-सबब नहीं ग़ालिब,
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है…

उसकी आँखों को कभी गौर से देखा है फ़राज़,
रोने वालों की तरह जागने वालों जैसी…

यूँ तुझे ढूँढने निकले की ना आये खुद भी
वो मुसाफ़िर की जो मंजिल थे बजाये खुद भी

कितने ग़म थे की ज़माने Read more

बुलंदी देर तक किस शख्स के हिस्से में रहती है
बहुत ऊँची इमारत हर घड़ी खतरे में रहती है

बहुत जी चाहता है कैद ए जाँ से हम निकल जायें
तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है…

-मुनव्वर राना

वो नहीं मिला, तो मलाल क्या , जो गुज़र गया, सो गुज़र गया
उसे याद करके न दिल दुखा , जो गुज़र गया, सो गुज़र गया

न गिला किया, न ख़फ़ा हुए, Read more

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन Read more

झूठी बुलंदियों का धुँआ पार कर के आ
क़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आ

इस पार मुंतज़िर हैं तेरी Read more

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया Read more

चेहरों की धूप आँखों की गहराई ले गया|
आईना सारे शहर की बीनाई ले गया|

डूबे हुए जहाज़ पे क्या Read more

साये उतरे, पंछी लौटे , बादल भी छुपने वाला है
लेकिन मैं वो टूटा तारा, जो घर से जाने वाला है

फिर सुबह हुई आँखें खोलें , Read more

मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे,
अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते,
जब कोई तागा टूट गया Read more

तुम्हारे जिस्म की खुशबू गुलों से आती है
ख़बर तुम्हारी भी अब दूसरों से आती है

हमीं अकेले नहीं जागते Read more

ये मुहब्बत भी है क्या रोग फ़राज़,
जिसे भूले वो सदा याद आया…