सर-ए-राह-ए-तलब दुनियां ग़म लेती है
ज़ुल्फ है की उलझ कर ही दम लेती है

—सुरेश सांगवान ‘सरु’

उनसे मत कहना, कि उन्हें याद किया है,
ऐ हवा उनसे मिलके आना जरुर।

मुझे जुल्फें संवारने का मौका दें ना दें,  Read more

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची

मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है  Read more

जो नज़रो से एहतराम,हमारा नही करते,
उनसे गुफ्तगूं भी, हम गंवारा नही करते,

तरसते रहे दीवाने, उनके दीद को,मगर,  Read more

नजदीकियां तो हम भी बढ़ा लेते उनसे…
पर एक तरफा इश्क़ के खुमार का, नशा ही कुछ ओर था …
मेरे अजीब दोस्तों का तुम्हें भाभी कह के बुलाना और Read more

तेरा हाथ, हाथ में हो अगर, तो सफर ही असले हयात है.
मेरे हर कदम पे है मंज़िलें, तेरा प्यार ग़र मरे साथ है,

मेरी बात का मेरी हमनफ़स, तू जवाब दे कि ना दे मुझे, Read more