रौनक-ए-बज़्म, जीनत-ए-खुदाई,
नूर-ए-चश्म, हुस्न इन्तहाई ||

शब-ए-शायर, जाम-ए-शिरीं,  Read more

बड़े शौक से उतरे थे हम समंदर-ए-इश्क में,
एक लहर ने ऐसा डुबोया कि फिर किनारा ना मिला…<3

सफर मोहब्बत का दुश्वार कितना है,
मगर देखना है कोई वफादार कितना है,
यही सोच कर कभी उसे नहीं माँगा हमने,
उसे आजमाना है की वो मेरा तलबगार कितना है…

एक ही चौखट पे सर झुके तो सुकून मिलता है,
भटक जाते हैं वो लोग जिनके हजारों खुदा होते हैं…

वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत हैं,
वो रोज नया जख्म देती थी मेरी ख़ुशी के लिए…

मैं रोज गुनाह करता हूँ वो रोज बख्श देता है,
मैं आदत से मजबूर हूँ वो रहमत से मशहूर है…

मेरी मुहब्बत मेरे दिल की गफलत थी, मैं बेसबब ही उम्र भर तुझे कोसता रहा,
आखिर ये बेवफाई और वफ़ा क्या है, तेरे जाने के बाद देर तक सोचता रहा…

हमसे भुलाया नही जाता एक “मुख्लिस” का प्यार,
लोग जिगर वाले है जो रोज़ नया महबूब बना लेते है…<3

रहता हूँ मैखाने में तो शराबी न समझ मुझे,
हर वो शख्स जो मस्जिद से निकले नमाज़ी नहीं होता..

अगर कुछ सीखना है तो आँखो को पढना सीख लो,
वरना लफ़्ज़ों के मतलब तो हजारों निकलते हैं…

इसे इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे दर्द की हकीक़त,
आँखे जब भी नम हुई वजह तुम निकले…

मेरे लफ़्ज़ों की पहचान अगर कर लेता वो ‘फ़राज़’
उसे मुझसे नहीं खुद से मुहब्बत हो जाती…