जिन्दगी भी बङी कमबख्त चीज है
मिलती तो एक बार है पर रूलाती बार-बार है
-Nisha nik.

दर्द में हम गाते है, लोगो को अपने नगमे हम सुनाते है
हम लिखते है तुम्हारी याद में और लोग हमे  शायर कह जाते है।

 

किस पर क्या गुजरी किसी को क्या खबर
कुछ नहीं मिलता किसी को अपना हाल सुना के।

खुशियाँ तो आजकल बोतलों में बंद हो गयी है दोस्तों
गम जब बढ़ जाता है तो खरीद लाते हैं।

मुझे तूझसे कोई सिकवा नही
तेरे दरद को श्यारी बना दिया

मैंने भी अपने हारे मुकदर को
तेरी याद में जीत का सिकंदर बना दिया

-Nisha nik.

किस दर जाऊ ?
मुझे पता ही नही

किससे मांगू ?  Read more

आंसुओ का कैसा ये मंजर है
ऐसा लगता आँखो में ही समन्दर है

आब -ए -चश्म आँखो से सदा बहता है
ऐसा लगता समन्दर का आब -ए -तल्ख़ है।
-Nisha nik

दर्द लाख सही बेदर्द ज़माने में
मगर जाता भी क्या है मुस्कुराने में

सुरेश सांगवान ‘सरु

इश्क की अदालत में हार मेरी लाज़िमी थी,
ये नादाँ दिल मेरा पैरवी उसकी करता रहा.
~ मनोज सिंह”मन”

चले गये वो तो होश आया मुझे/
कई अनकहे शिकवे रखे रह गये//
आभा….

ऐ अन्ज़ान,
इससे बेहतर क्या सजा थी, जो वो देती मुझको।
कर गयी मुझको तनहा, मगर अपना बना के।

ऐ अन्ज़ान,
तुम मेरे ऊपर कोई इल्ज़ाम मत लगाओ,
मैने तुम्हें चाहा था यही इल्ज़ाम बहुत है।

क्या खूब  गुजरी हमारे साथ भी
दुनिया वाले प्यार मोहब्बत ऐशोआराम पाने को तरसते है
और हम
गैरो का तो छोड़ो अपनो का ही भरोसा पाने के लिए तरस गये।

इतना खुदगर्ज़ भी नही हुआ, तेरे जाने बाद,
कि तेरी यादों को भी, अब दिल से निकाल दूँ.
~ मनोज सिंह”मन”

रख दी है दिल की बात मैनें हर ज़बान में
क्या रख दूं तेरे सामने मैं दिल निकाल के

ईश्क हम आज भी तुझे बेपनाह करते है
तेरा इंतजार बस अब नहीं करते है….
आभा….

इस बात पर यक़ीं को दिल तैयार ही नहीं था
सौदा था व्यापार मेरा वो प्यार ही नहीं था

तुम मुझ पर लगाओ मैं तुम पर लगाता हूँ,
ये ज़ख्म मरहम से नही इल्ज़ामों से भर जायेंगे. ~a~

किसे सुनाऊ  अपने दिल के हालात एे खुदा,
कोई ऐसा मिला ही नही जो मेरे जज़्बात  भी समझता। ।  Read more

ज़िन्दगी तेरी आजमाइशें
मेरी तुझसे फरमाइशें
घटती क्यों नहीं !