सोचो तो सब है जिन्दगी ,
न सोचो तो एक fun है जिन्दगी,
इब्बादत करो तो खुदा है जिन्दगी ,
ना मानो तो चंद सासो की एक माला है जिन्दगी।

गर मै तेरे अन्दर कहीं ठहर गयी हूं
तो हर सांस के साथ तुझमें जी लूंगी
आभा..

फिर गद्दारों का मान हुआ,
भारत माँ का अपमान हुआ।
दिल्ली की स्वच्छंद हवाएं क्यों बदली,  Read more

अरसा हुआ तेरी बांहो से छूटे हुये मगर
बंद पलकों में हर सांस महकती है..
आभा..

दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल
पापा की प्यारी मेरी गुलगुल

आँखों का ख़्वाब रातों की नींद  Read more

साँस टूट चली है इक तुम तक आने में
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

—सुरेश सांगवान’सरु’

ये मौत क्या दफन करेंगी हमारी सांसों को…
जब हमारी सांसों पर हमारा अधिकार ही न रहा…
हम बस कहते रहे कि हमें मुहब्बत नहीं उनसे…
और न जाने कब हमारे दिल पर हमारा इख्तीहार ही न रहा…

चले जाना तुम भी इस प्रयाग नगरी से,
जब भी चाहना,
चले जाना….
ऐ अन्ज़ान,
बस इतनी सी गुजारिश है कि इस संगम तट पर..
मेरी साँसें बिखरने तक मेरे रह जाओ?
अतुल अन्ज़ान
एल-एल.बी

ना हवाओं का घर कहीं साँस भी चलती रहती है
हाय जाता कहाँ है वक़्त उम्र भी कब ठहरती है

सुरेश सांगवान’सरु’

ऐ अन्जान,
अब आदत सी हो गई है तुम्हारे करीब रहने कि,
इतना तो बता दो कि तुम्हारे सांसों कि खुशबू वाला परफ्यूम कहाँ मिलेगा।

जन्म लिया है तो सिर्फ साँसें मत लीजिये, जीने का शौक भी रखिये..
शमशान ऐसे लोगो की राख से.. भरा पड़ा है
जो समझते थे…कि दुनिया उनके बिना चल नहीं सकती ?
अतुल अंज़ान

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले Read more

दोस्ती जब किसी से की जाये,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर हैं फिजाओं में, Read more