दुनियां तेरी भीड़ में शामिल मैं भी हूँ
तेरी तरहा दर्दो को हासिल मैं भी हूँ

इक अपना ख्याल रखा होता तो काफ़ी था  Read more

जिससे लिखा था तेरा नाम कभी ~
वो रंग उड़ने लगा है अब दिल की दीवारों से ।

इक ज़रा सी ज़िंदगी में इम्त्तिहां कितने हुये
बोलने वाले न जाने बेज़ुबाँ कितने हुये

ध्रुव तारा ज़िंदगी का कौन होता है कहीं  Read more

मैं शायर तो नही, करता हूँ शायरी तेरी याद में
मेरे कदमो में ज़न्नत तो नही, लेकिन तेरी मोहबत किसी ज़न्नत से कम तो नही.
-Nisha nik.

आँखो के रस्ते से दिल मे ऊतरती हो
सरमो सरमी के हर पहरे को तोङती हो  Read more

बुझे चराग़ में भी कुछ जला रखा है
ज़िंदगी में क्या जाने मज़ा रखा है

नहीं होता ज़ोर किसी का किसी पर  Read more

तुम ने चाहत भरी नजरो से देखा हमें
हम गलत समझ बैठे
तुम्हारे इस दिल लगी को मोहब्बत समझ बैठे।

राधा सुकुमारी
प्यार से भी प्यारी
कान्हा के मुरली के तनो पर झुमती ये बृज दुलारी  Read more

एक टीस सी उठती है दिल में जब वो कहते हैं
कि मोहब्बत तो है मगर किसी और से।

मोहबत में तन्हाई है
तेरे और मेरे मिलने में रूसवाई है
तूने अपनो को छोङा मेरे लिए
खुदा की नाइंसाफी देखो
मैने जग ही छोङ दिया तेरे लिए।

इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो
अपनी मोहब्बत का असर देख लेने दो

हर तस्वीर में मेरी तेरे ही रंग हों  Read more

मुस्कान पर कुर्बान था, मुद्दत की बात है,
कोई हंसी खेल न, मोहब्बत की बात है।

है पराई वो अगर, तो हैरत की बात क्या,  Read more

फेर ली ग़र निगाहें, हया से किसी ने,
फ़कत इक नजाकत थी,नफरत न थी।

फिर तकल्लुफ किया,बदली राहें सभी,  Read more

मोहब्बत है मुझे तुमसे एक दिन तुझको भी हो जायेगी
छायी है जो ये घटायें बनकर खुशियाँ बरस जायेगी
कुछ इस तरह से होंगे इक दुजे के हम
कि हमारी मोहब्बत मिसाल बन जायेगी।

तुझे पाने को तेरे नाम से कई दें चुका हूँ अर्जीयाँ,
चलती नहीं मेरी रज़ा सब चलती रब की मर्जीयाँ।
झूठी कसमें झूठे वादे झूठी तेरी मोहब्बते, Read more

दूरियां दीवार की मोहताज़ नहीं होती
नफ़रते तलवार की मोहताज़ नहीं होती

कौन बोले है न बोले रब के लिये  Read more

रोज़ तेरा इंतजार करती हूं
रोज़ तेरा एतबार करती हूं
तू आ पाये या न आये पर
तिरी महक में डूबी रहती हूं
आभा चन्द्रा

लिखा ही समझते हैं न ज़बानी हमारी
यही है मुद्दत से परेशानी हमारी

दिया जो दिल किसी को वापस नहीं लेते Read more

मुहब्बत के सिवा जीने की तदबीर न देख,
रक़्स करना है तो फिर पांव की ज़ंजीर न देख.

–सुरेश सांगवान’सरु’

बे-क़रारी शोर मचा सकती है
आसमाँ सर पे उठा सकती है

रू-ब-रू हो मौत से इक बार तू  Read more