मैं शायर तो नही, करता हूँ शायरी तेरी याद में
मेरे कदमो में ज़न्नत तो नही, लेकिन तेरी मोहबत किसी ज़न्नत से कम तो नही.
-Nisha nik.

आँखो के रस्ते से दिल मे ऊतरती हो
सरमो सरमी के हर पहरे को तोङती हो  Read more

उस दिन रह जाएंगे हम अकेले हमेशा के लिए
जिस दिन हो जाओगे तुम किसी के सदा के लिए।

तेरे संग जीने की चाहत है
तुझसे मिलने की उल्फत है

एक बार जो तुझसे मिल लू
यही मेरी इबादत है।

-Nisha nik.

अगर लौटा सको तो वो हसीन पल दे जाना
जिसमें तुम हमारे और हम तुम्हारे थे..
आभा..

ऐ अन्ज़ान,
क्या कहा…,,
याद कर रहे हो…
हाय! भूल गये थे क्या?

तुम लाख़ कोशिशें करलो ‘आकाश’, अब कभी ना हो पायेगी सुलह,
गर फ़िर भी मिलना चाहो, तो मिलते रहना एक अजनबी की तरह…

कल रात चुपके से दिसम्बर ने ये सरगोशीं की,
ऐ अन्ज़ान,
क्यूँ ना इक बार फिर तुम्हें हँसा दूँ जाते -जाते।

चाँद मुखबिर है तुम्हारा, तो होने दो
याद में नैना मुस्करायें है शब भर
आभा..

मै जो भी हूँ,
जैसी भी हूँ,
बस तुम्हारी हूँ,
मुझसे ऐ अन्ज़ान,
मेरी जात ना पूँछो।

जो लफ्ज़ पढ लिये है आंखो ही आंखों में
उनके लबों से सुनने की तमन्ना है बस….
आभा..

सामने ये मेरे मंज़र नहीं होता
तू बसा गर दिल के अंदर नहीं होता

सुरेश सांगवान’सरु’

कितनी ही ना जाने शाखों में बटी हूँ
पत्नी हूँ माँ हूँ बहन और बेटी हूँ

–सुरेश सांगवान’सरु’

उस जैसा मोती पूरे समंद्र में नही है,
वो चीज़ माँग रहा हूँ जो मुकद्दर में नही है,
किस्मत का लिखा तो मिल जाएगा मेरे ख़ुदा,
वो चीज़ अदा कर जो किस्मत में नही है……

दोस्त मिरे ये जानकर आराम आ गया
अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया

–सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

मोहब्बत है मुझे तुमसे एक दिन तुझको भी हो जायेगी
छायी है जो ये घटायें बनकर खुशियाँ बरस जायेगी
कुछ इस तरह से होंगे इक दुजे के हम
कि हमारी मोहब्बत मिसाल बन जायेगी।

अपनी इन नशीली निगाहों को जरा झुका दीजिए जनाब,
मेरा मजहब मुझे नशे की इजाज़त नहीं देता ।

साँस टूट चली है इक तुम तक आने में
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

—सुरेश सांगवान’सरु’

इंतजार अब भी है तुम्हारा आज भी चाहत वही है।
माना कुछ गलतियां की है हमने मगर हम इन्सान बुरे नहीं है।

जो भी मेरी ज़िंदगी में ख़ास रहा है
यूँ समझो मुहब्बत का अहसास रहा है

—–सुरेश सांगवान’सरु’