जग हमे भुल जाये, पर तुम ना भुलाना कभी
आँखे कभी हमारी मिल जाये तो, आँखे ना चुराना कभी

हम जिन्दगी का सफ़र , साथ निभा तो नही सकते
पर जब साथ देने का समय आये तो हाथ ना छुङना कभी।

Nisha nik.

आँखो के रस्ते से दिल मे ऊतरती हो
सरमो सरमी के हर पहरे को तोङती हो  Read more

उस दिन रह जाएंगे हम अकेले हमेशा के लिए
जिस दिन हो जाओगे तुम किसी के सदा के लिए।

पिला दे कितनी भी साक़ी फिर भी
रह जाती है क़सक बाक़ी फिर भी

–सरु

वो मज़ा ए तड़प कहाँ ग़र सब एक साथ मिल जाय,
ग़ुमनाम किश्तों मे मरने का मज़ा ही कुछ और है… ग़ुमनाम

ऐ जिन्दगी मुझे तुझसे बस इतना चाहिए
तू कभी मेरा साथ देना या मत देना  Read more

किस दर जाऊ ?
मुझे पता ही नही

किससे मांगू ?  Read more

हम दुअओ में तुम्हे मांगना नही चाहते
पर तुम्हे ही पाने की सोचते है  Read more

ऐ अन्ज़ान,
इस वकालत के पेशे में हर तरीका हमने आजमा के देखा है,
जो किस्मत से नही मिलते, वो किसी कीमत पर नही मिलते।

आंसुओ का कैसा ये मंजर है
ऐसा लगता आँखो में ही समन्दर है

आब -ए -चश्म आँखो से सदा बहता है
ऐसा लगता समन्दर का आब -ए -तल्ख़ है।
-Nisha nik

आँखो में मेरे शराब है
पुरा बदन शब्ब है
अगर चाहत हो हुजूर को होठो से जाम चकने की
मयखाना -ए -शब्ब तैयार है।

तुम ने चाहत भरी नजरो से देखा हमें
हम गलत समझ बैठे
तुम्हारे इस दिल लगी को मोहब्बत समझ बैठे।

कभी पास बैठ कर गुजरा कभी दूर रह कर गुजरा
लेकिन तेरे साथ जितना भी वक्त गुजरा बहुत खूबसूरत गुजरा ।

मायूस हो गया हूँ जिंदगी के सफर से इस कदर
कि ना खुद से मिल पा रहा हूँ ना मंजिल से।

थम जा ऐ वक्त आज यही पर,
फिर ना जाने कब उनसे मुलाकात होगी।

खुदाया क्या खूब हुनर पाया है उन्होंने ख़ामोशी का,
ग़ुमनाम, वो लब भी नहीं हिलाते और दास्ताँ हो जाती है… ग़ुमनाम

हम खुबसूरत नही औरो की तरह
पर इस में भी गलती हमारी नही

उस ऊपर वाले ने हमे बनाने में जल्दी कर दी
इसलिए चेहरा बनाने में कुछ कमी कर दी।

मोहबत में तन्हाई है
तेरे और मेरे मिलने में रूसवाई है
तूने अपनो को छोङा मेरे लिए
खुदा की नाइंसाफी देखो
मैने जग ही छोङ दिया तेरे लिए।

टुटती हूँ हर पल ऐसे
जैसे किसी के हाथो का खिलौना बन गई हूँ
कभी किसी के साथ को पाने के लिए टूटती हूँ
तो कभी किसी के साथ को भुलाने के लिए टूटती हूँ
कभी किसी के आँखो

कहीं रातो से जागी हूँ मुझे इस रात सोने दो,
तेरे गितो को सुनकर के मुझे बेहोश होने दो,
कहीं सदियों से बस मैं युहि हसती आई हूँ
तुमसे मिलकर आज मुझको ये पलकें भिगोना दो,
बहुत ढूंढा है जिन्दगी को, इतना थक चुकी हूँ मैं,
कि बस अब मुझे जमाने में कहीं गुमनाम रहने दो,