ये अलहड सी हवायें,
मुझको तेरी याद दिलाती हैं।
जब पूरवायि चलती हैं
तो तेरे पास होने का ऐहसास दिलाती है।
ये गरम-गरम सी हवायें तेरे दूर होने की
खबर से मेरे दिल को जलाती है।
ये अलहड सी हवायें ,
मुझको तेरी याद दिलाती है।

आप हम से न बोले तो बेखुदी हमारी बढती है,
हम आप से न बोले तो जा हमारी निकलती है,
हम किस दरद से गुजर रहे है ये खुद से पूछिये
क्योंकी जो दरद हम सह रहे है ,
आप भी उसी दरद से गुजर रहे है।

भारत का किसान आज भी परेशान
ना कोई पहचान ना कुछ सम्मान

भारत के रीढ़ में क्यूँ है पीड़ Read more

हर इंसान का धर्म होता है
धर्म आपसी एकता का
एक मजबूत जोड़ है

समाज में धर्म के नाम पर Read more

एक दौर
जहाँ सिर्फ प्रगति की
विकास की बातें होनी थी
अत्याचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ  Read more

गणतंत्र दिवस के पावन पर्व पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ कुछ पंक्तियाँ —

भारत भूमि बलिदानों की, बड़े कठिन से पाया,
जिसको हँसकर बड़े विधि से, रब ने रम्य बनाया। Read more

छोटी-छोटी जंगली बेरों की
पुड़िया बनाकर
नमक के साथ Read more

बेटी बचाओ,बेटी पढा़ओ से प्रेरित मेरी रचना “बेटियाँ” के कुछ अंश….

********************बेटियाँ********************

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह,
पनपती आधार हैं। Read more

वो नन्हा सा इक पल जाने
कैसे छल गया मुझको
लाख बचाया लाख सम्हाला  Read more

अग्निकुंड में डूब कर
भी “मैं” नहीं पिघलता

जलता हूं फिर भी नही मरता  Read more

इक रोज़ संग साथ बैठे बैठे
कलम कागज़ और कीबोर्ड बतिया बैठे

अपनी श्रेष्ठता के मद में कीबोर्ड चूर चूर था  Read more

ना किसी की यादों ने सताया कभी
ना कभी दिल टूटा हैं
हमारा दिल तो वो पानी है दोस्तों
जो अपनी मस्ती मे बहता है
फिर भी ना जाने क्यू ख्याल आजकल किसी अजनबी का रहता है।

नजदीकियां तो हम भी बढ़ा लेते उनसे…
पर एक तरफा इश्क़ के खुमार का, नशा ही कुछ ओर था …
मेरे अजीब दोस्तों का तुम्हें भाभी कह के बुलाना और Read more

1.
कितनी मरीचिकाओं से घिरी मैं~
खुद को खुद में ढूंढा करती मैं~

कितने अलग से निरपेक्ष से तुम~ Read more

जब आप आप न रहे
तो मिलन मिलाप न रहे

ज़िंदगी ऐसे जियो  Read more

बहुत ढूंढा मैने
पर
अब नही मिलते हैं

वो पुराने दिन
जो  Read more

“मौन” है जिनकी वाणी, “मौन” ही जिनका ध्यान,
“मौन” ही जिनकी साधना, वो हैं मेहेर बाबा “मेहेरवान”|

“मौन” रहकर ही दिया, उसने “मौन” का ज्ञान,  Read more

आँखें मेरी भी गीली हो जाती है माँ
तू बहुत ज्यादा याद आती है माँ

चली थी तो खुश थी, डांट नहीं सुनूंगी अब  Read more

एक चेहरा था ,दो आखें थीं ,हम भूल पुरानी कर बैठे .
एक किस्सा जी कर खुद को ही, हम एक कहानी कर बैठे …

हम तो अल्हड-अलबेले थे ,खुद जैसे निपट अकेले थे , Read more

मैं तुम्हारे लिए, जिंदगी भर दहा,तुम भी मेरे लिए रात भर तो जलो !
मैं तुम्हारे लिए, उम्र भर तक चला,तुम भी मेरे लिए सात पग तो चलो..!

दीपकों की तरह रोज़ जब मैं जला,तब तुम्हारे भवन में दिवाली हुई,  Read more