भारत का किसान आज भी परेशान
ना कोई पहचान ना कुछ सम्मान

भारत के रीढ़ में क्यूँ है पीड़ Read more

हुआ बहुत प्रलाप अब, दूर करो संताप अब,
निर्दोषों के खून का, धरती मांगे हिसाब अब |

सूनी कोख और सूनी बाहें, राह तकती सूनी निगाहें,  Read more