उस दिन रह जाएंगे हम अकेले हमेशा के लिए
जिस दिन हो जाओगे तुम किसी के सदा के लिए।

इस क़दर अजनबीपन अपने ही घर में लगा
जो भी अकेला मिला अपना सा लगने लगा..
आभा..

याद आऊं चले आना, लम्हा वहीं थमा है//
जिस मोड़ पर तुमने, अकेला कर दिया है//
आभा…

भीड़ तन्हाई की घटे तो खुद को ढूंढू मैं
कि तेजी है बहुत, अकेली रात के लहज़े में…..
आभा…

मैं अपने साथ रहता हूँ हमेशा,
अकेला हूँ मगर तन्हा नहीं हूँ…