तेरे ज़िक्र से ही संवर जाते हैं-
लफ्ज़ भी क्या तुझे छू आते हैं-
आभा….

जब भी किसी ने बारहा ज़िक्र तेरा किया
खो गयी आंखे दिखायी दूर तक न दिया….
आभा….