यूँ चेहरे पर नक़ाब लगाते हैं लोग,
कुरेद के ज़ख्म मेरे, मुस्कुराते हैं लोग,

आइने का ही ऐतबार हो तो कैसे हो,  Read more

दिल के जख्मों पर, मलहम लगा दिया,
वरना नासूर हो जाता, तो क्या करता।

नामूमकिन ख्वाबों को, खामोश कर दिया, Read more

दिल के जख्मों पर, मलहम लगा दिया,
वरना नासूर हो जाता, तो क्या करता।

नामूमकिन ख्वाबों को, खामोश कर दिया,  Read more

ऐ अन्ज़ान,
तुम्हारी यादों की मिट्टी में,
आज फिर उन जख्मी लम्हों को दफ़ना कर आया हूँ।

गर आंखो को अश्क पीना आ गया होता
मेरी दीवानगी को भी जीना आ गया होता

भूल जाते हम भी हर इक गम अपना  Read more

तुम मुझ पर लगाओ मैं तुम पर लगाता हूँ,
ये ज़ख्म मरहम से नही इल्ज़ामों से भर जायेंगे. ~a~

रोने में इक ख़तरा है, तालाब नदी हो जाते हैं
हंसना भी आसान नहीं है, लब ज़ख़्मी हो जाते हैं

इस्टेसन से वापस आकर बूढ़ी आँखें सोचती हैं Read more

दोस्ती जब किसी से की जाये,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर हैं फिजाओं में, Read more