अपना ही शहर आज मुझे बेगाना क्यूँ लगा
मेरी ग़रीबी की हक़ीक़त अफ़साना क्यूँ लगा

प्यार सदा से था इसमें दिल ही ऐसा पाया है  Read more

ए ज़िंदगी बड़ी अजीब हो तुम
अमीर तो कहीं ग़रीब हो तुम

कोई नाम दो अब रिश्ते को  Read more

सिर पर भारी बोझ उठाये चलता है
जिससे सारे कुनबे का पेट पलता है

आंगन से बाहर नहीं निकल पाती  Read more