उल्फ़त में ग़म के ख़ज़ाने क्या- क्या निकले
हम अपनी आँखों को दिखाने क्या- क्या निकले

समझा था ये दिल तो उसे ही मंज़िल अपनी  Read more

इस जिन्दगी की बस एक ही कहानी है,
कंही ठहरा तो कंही बहता हुआ पानी है,

न जाने कोई राज़  बहते हुये अश्कों का,  Read more

अपने घर के सब दरवाज़े खोल दो
बंद कमरों में गीत नहीं लिख पाऊँगा ।

नक़ाब सारे हटा दो अपने चेहरे के  Read more

“ग़म में हूँ या हूँ शाद मुझे खुद पता नहीं
खुद को भी हूँ मैं याद मुझे खुद पता नहीं
मैं तुझको चाहता हूँ मगर माँगता नहीं Read more