जश्न मना काफ़िर जरा, आज मौका ख़ुशी का है,
जला है घर मेरा अभी, ये नज़ारा उसी का है,

बातें लिखी है वादों भरी, इन रद्दियो के ढेर में, Read more

ये ख़त है किसी का समाचार थोड़े ही है
नंबर क्यूं लगा बैठे अख़बार थोड़े ही है.

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?
एक ख़ामोश-सा जवाब तो है।

डाक से आया है तो कुछ कहा होगा  Read more

तूने खतों में जो रोशनाई इस्तेमाल की
वो आज तक मेरे दिल में चमकती है….
आभा..

अजनबी ख्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूँ
ऐसे जिद्दी हैं परिन्दें कि उड़ा भी न सकूँ

फूँक डालूँगा किसी रोज़ Read more