टुटती हूँ हर पल ऐसे
जैसे किसी के हाथो का खिलौना बन गई हूँ
कभी किसी के साथ को पाने के लिए टूटती हूँ
तो कभी किसी के साथ को भुलाने के लिए टूटती हूँ
कभी किसी के आँखो

उनसे मत कहना, कि उन्हें याद किया है,
ऐ हवा उनसे मिलके आना जरुर।

मुझे जुल्फें संवारने का मौका दें ना दें,  Read more

एक पल के लिए बनाने वाला भी रोया होगा,
किसी का अरमान जब यूँ मौत की नींद सोया होगा।
हाँथों की मेहँदी छूटी भी नहीं कि चूड़ियाँ तोड़नी पड़ी,
कौन है जो ये लम्हा देखकर न रोया होगा।

तलाश जिसकी रही हाथ वो ख़बर आई
आँखें बंद जब हुई रोशनी नज़र आई
–सुरेश सांगवान’सरु’

कुछ नहीं रखा ए दोस्त हाथ की लकीरों में
इक उम्र बिताई है हमने भी फकीरों में
सुरेश सांगवान’सरु’

आस्मां हमेशा मेरे ही कदमों में नजर आया करता है ~~
मां की दुआओं का हाथ सदा सिर पर छाया रहता है~~
आभा….

ऐ अन्ज़ान, क्या बँटवारा था हाथ की लकीरों का भी,
उसके हिस्से में जज की कलम और मेरे हिस्से में वस वही वकालत।

मैने कभी अपनी चाहत का वज़न नहीं देखा
जब किसी ने पूछा दोनो हाथ फैला दिये इतना….
आभा….

हाथों की लक़ीरों ने क्या खेल दिखाया,
जिनसे न मोहब्बत थी हमें उनसे मिलाया।

हाथों में नहीं दम पांवों भी थके हैं,  Read more

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे।

होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते  Read more

वो हाथ कुछ अजीब से लगते हैं किसी और के हाथों में,
जिन हाथों की चूड़ियाँ कभी टूटी थी मेरे ही हाथों में…