हसरत अभी बाकी है कुछ शाम अभी बाकी है,
तेरे होठों पे थिरकती हुयी ग़ज़ल लगती है यूँ, 

ग़ुमनाम मयकदे में हूँ, और जाम अभी बाकी है,  Read more

शाम जैसे-जैसे सहर को ढ़लती गई,
हसरत की आंधी दिल में मचलती गई।
वो आएं न आएं मुकर्रर उनको करना है,
अपनी तो हर रात तसव्वुर में ही पलती गई।

माना महरूम हुये है हम तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे कंही राहों में हमें, Read more

माना महरूम हुये है हम,तेरी चाहत से,
मगर यकीं उठा नही है अभी मोहब्बत से,

जब भी दिख जाओगे,कंही राहों में हमें,  Read more