ये अलहड सी हवायें,
मुझको तेरी याद दिलाती हैं।
जब पूरवायि चलती हैं
तो तेरे पास होने का ऐहसास दिलाती है।
ये गरम-गरम सी हवायें तेरे दूर होने की
खबर से मेरे दिल को जलाती है।
ये अलहड सी हवायें ,
मुझको तेरी याद दिलाती है।

उनसे मत कहना, कि उन्हें याद किया है,
ऐ हवा उनसे मिलके आना जरुर।

मुझे जुल्फें संवारने का मौका दें ना दें,  Read more

ये कौन न जाने दुआएँ दे रहा है
सूखे पत्ते को हवाएँ दे रहा है

–सुरेश सांगवान ‘सरु’

देखें हवाएँ ले चलें अब कहाँ तक मुझे
मजबूरियों ने चलाया है यहाँ तक मुझे
-सुरेश सांगवान’सरु’

वो नन्हा सा इक पल जाने
कैसे छल गया मुझको
लाख बचाया लाख सम्हाला  Read more

ना हवाओं का घर कहीं साँस भी चलती रहती है
हाय जाता कहाँ है वक़्त उम्र भी कब ठहरती है

सुरेश सांगवान’सरु’

तहरीरें   काग़ज़   पर   उतार  लीजिये
लीजिये ये  क़लम   मेरा   उधार   लीजिये

जब  फ़र्श-ए-गुल लगा  दिया हवाओं ने Read more

ठंडी हवाएं क्या चली मेरे शहर में,
हर तरफ यादों का “दिसंबर” बिखर गया…♥