मीठी नशीली बातों का काफ़िला भी देखा है
जाने ग़ज़ल हमने वो काफ़िया भी देखा है

पूछे लोग मुझसे क्या मैक़दा भी देखा है Read more

एक दौर
जहाँ सिर्फ प्रगति की
विकास की बातें होनी थी
अत्याचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ  Read more

फूँक से सूरज बुझाना छोड़ दो
रेत की मुट्ठी बनाना छोड़ दो

हो नहीं सकता जहाँ दिल से मिलना  Read more

यूँ मौसम का असर गया गोया
रंग-ए-गुल और निखर गया गोया

हुआ महसूस ये देखकर उसे  Read more

तेरी आंखो में इक सूरज चमक जाता है~
तपन से इसकी मेरा मन तरस जाता है~
आभा…