#G3

कौन कहता है ख़ामोशी बदग़ुमां है,
ज़रा ग़ौर से सुनिये इसकी अपनी ज़ुबां है,  Read more

खुशी मुझे इतनी की बसर हो जाय,
उन्हें महल से घर में एहतमाम की चिंता थी।

हम मिल बांट के गुजर करते हैं अब भी,  Read more

शाम ढली हम घर चले
दिन भर मस्ती कर चले

रातें लाई घर हमें  Read more

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं
ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में  Read more

पास आने नहीं देते
मुस्कुराने नहीं देते

बोझ ज़िम्मेदारियों के Read more

सुबह की सफेदी ने आसमान का स्हाय रंग उडा डाला….
रात की हुकूमत लुट जाने से इन उदास तारों ने खुद को छिपा डाला….
उनके इश्क़ की हुकूमत ही इतनी थी हमारी रुह पर के ना चाहते हुए भी हमने उन्हें अपनी मल्लिका बना डाला……

ख्वाहिश है इस दिल की ये
ऐ वक़्त ज़रा तू पीछे चल।
मैं जी लूँ फिर से लम्हे वो Read more

इस अतुल अन्ज़ान की भी जिन्दगी किसी रोज़ होगी रोशन,
उसे इन्तज़ार सुबह का नही, बस किसी के लौट आने का है!

मेरी सुबह तुम, मेरी शाम तुम,
मेरी जिंदगी तमाम तुम,

सब कुछ मेरा अब तुझसे ही,
मेरी ख़ास तुम मेरी आम तुम,  Read more

कभी पुरानी गलियों में भी हो लेना
के दरवाजे अब भी रास्ता देखते हैं
सुबह कुछ अनमनी सी है दोपहर में  Read more

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