हुई शब तो चाँद -सितारों को पहरेदार किया
उतर के पानी में दरिया को खुद ही पार किया
—-सुरेश सांगवान ‘सरु’

अभी इन आँखों पर पलकों का गुज़र जाना बाकी है,
ये नींद सामने है पर आपकी आँखों पर संवर जाना बाकी है,
रात गहरी है और सपनो का बिखर जाना बाकी है,
आप मुराद मांगिये तो सही ये सितारा अभी टूटा नहीं, इसका टूट जाना अभी बाकी है. Read more

सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे

कोई बताये के मैं Read more