है नन्ही सी बेटी बहन प्रियतमा पत्नी और माँ
जिंदगी की धड़कन हैं इनके बिन संसार कहाँ

–सुरेश सांगवान’सरु’

दूरियाँ बताएँगी नज़दीकियां कितनी हैं
इंसानी रिश्तों में बारीकियां कितनी हैं

—-सुरेश सांगवान’सरु’

पास आने नहीं देते
मुस्कुराने नहीं देते

बोझ ज़िम्मेदारियों के Read more

कुछ नहीं रखा ए दोस्त हाथ की लकीरों में
इक उम्र बिताई है हमने भी फकीरों में
सुरेश सांगवान’सरु’

फूँक से सूरज बुझाना छोड़ दो
रेत की मुट्ठी बनाना छोड़ दो

हो नहीं सकता जहाँ दिल से मिलना  Read more

मन के मैल से उल्फ़त का जंतर टूट जाता है
साहिल टूट जाये तो समंदर टूट जाता है

बिखर गया तिनका तिनका आँधी के आने से  Read more

तेरी याद ज़हर हो तो क्या करें
ज़ीस्त जब दूभर हो तो क्या करें
–सुरेश सांगवान ‘सरू’