दोस्त मिरे ये जानकर आराम आ गया
अपना वही है वक़्त पे जो काम आ गया

–सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

दुनियां तमाम ख़रीद ली मेरी
नींद मगर भूल गये वो अमीर

—सुरेश सांगवान’सरु’ Read more

तलवार तीर तो कभी खंज़र भी आयेंगे
सेहरा कहीं कहीं पे समंदर भी आयेंगे

—-सुरेश सांगवान’सरु’

वो फूल निकला खुश्बू मुझमें छोड़ गया
हम खार बन के रह गए चुभते हैं आज भी

—सुरेश सांगवान’सरु’

ज़िन्दगी तेरे दर्द से हारता है कोई
प्यार दुनियां का ज़रूर मुग़ालता है कोई
—सुरेश सांगवान

ए फलक़ कभी देख तो आके ज़मीन पे
कैसे-कैसों को इसने संभाल रखा है

—-सुरेश सांगवान’सरु’

यादों को मिटाकर हक़ीक़त कर दो सनम
आओ पास आओ क़यामत कर दो सनम

—सुरेश सांगवान’सरु’

ठिकाना ढूँढती बहती हवा सी लगती हूँ
ज़िंदगी से नहीं खुद से खफ़ा सी लगती हूँ

मुझ में बस गई है आकर किस ज़ोर से देखो Read more

साँस टूट चली है इक तुम तक आने में
अभी तो घर भी जाना है यहाँ से

—सुरेश सांगवान’सरु’

माँ रोते में मुस्कुराना तुमसे सीखा है
कारे दुनियाँ का ताना-बाना तुमसे सीखा है

गर्दिश-ए-दौरा तो आनी जानी शै  Read more

माँ ही गुरू माँ ही ज्ञान
ईश्वर का उत्तम वरदान

पाठशाला तू ही तो है  Read more

ख़ुदाया प्यार में यूँ बंदगी अच्छी लगी
रही मैं ना मैं मुझे बेखुदी अच्छी लगी

खलाएँ जीस्त की मेरी तमाम भर गई  Read more

हौसलों की आज उड़ान देखिये
और सूरत-ए- आसमान देखिये

फूल पे बिखरी मुस्कान देखिये  Read more

मंज़िल अपनी जगह रास्ता अपनी जगह है
ज़िंदगी में सफ़र का मज़ा अपनी जगह है

मंदिर जाते हो कभी मस्जिद जाते हो Read more

लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये

—-सुरेश सांगवान’सरु’

यही है इल्म मिरा यही हुनर भी है
नहीं फसील-ए-अना यही गुज़र भी है

बसी है कहाँ इंसानियत जानूं हूँ  Read more

पानी से भी आजकल सस्ता हो गया
ज़मीर आसान-ओ-आम रास्ता हो गया
-सुरेश सांगवान’सरु’

जहां को दिलवालों की कद्र करते किसने देखा है
किसी पत्थर को आख़िर आह भरते किसने देखा है

सदा से आते जाते हैं मौसम ये रुत बहारों की  Read more

इश्क़ में हमारी बे-ज़ुबानी देखते जाओ
उस पर आलम की तर्जुमानी देखते जाओ

तुम ना आओगे कभी मुन्तज़िर हम फिर भी हैं  Read more

दिखाके इक झलक दिलबर इनायत कर दो
मिरे दिल पे आज कोई क़यामत कर दो
—सुरेश सांगवान’सरु’