देखें हवाएँ ले चलें अब कहाँ तक मुझे
मजबूरियों ने चलाया है यहाँ तक मुझे
-सुरेश सांगवान’सरु’

शाम ढली हम घर चले
दिन भर मस्ती कर चले

रातें लाई घर हमें  Read more

नहीं आसां नहीं है यहाँ सम्भल जाना
ज़िंदगी नहीं है मौसम का बदल जाना
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

बातें दिल की हैं हर किसी से कह नहीं सकता
मैं एक क़तरा हूं तनहा तो बह नहीं सकता

सुरेश सांगवान ‘सरु ‘  Read more

ये किस मक़ाम पर जाने तक़दीर मुझे ले आई है
मन तन्हा टूटी कश्ती और फलक़ पे तन्हाई है
–सुरेश सांगवान’सरु’

कुछ आगो-चिंगारी खाक़ मिरी से माँगते हैं
ये लोग पानी भी सूखी नदी से माँगते हैं
–सुरेश सांगवान’सॅरू’

दूरियां दीवार की मोहताज़ नहीं होती
नफ़रते तलवार की मोहताज़ नहीं होती

कौन बोले है न बोले रब के लिये  Read more

आँख में ख़्वाबों को सजाती हूँ
या कहो मुसीबतें बुलाती हूँ

जश्न महफ़िल में मैं मनाती हूँ  Read more

घर मेरी उम्मीदों के सरहद पार तेरा है
दिल के आइने में फिर भी इंतज़ार तेरा है
—सुरेश सांगवान’सरु’

लिखा ही समझते हैं न ज़बानी हमारी
यही है मुद्दत से परेशानी हमारी

दिया जो दिल किसी को वापस नहीं लेते Read more

बादशाह की मात को इक्के निकल आते हैं
पक्के वादे भी जब कच्चे निकल आते हैं

ये क़िताब-ए-ज़िंदगी और रिश्तों के धागे Read more

तलाश जिसकी रही हाथ वो ख़बर आई
आँखें बंद जब हुई रोशनी नज़र आई
–सुरेश सांगवान’सरु’

दुनियाँ से न्यारी मेरी गुलगुल
पापा की प्यारी मेरी गुलगुल

आँखों का ख़्वाब रातों की नींद  Read more

कोई सवाल ऐसा नहीं जवाब एक रखता हो,
आसमान सा तू कहाँ आफ़ताब एक रखता हो.
— सुरेश सांगवान’सरु’

मुहब्बत के सिवा जीने की तदबीर न देख,
रक़्स करना है तो फिर पांव की ज़ंजीर न देख.

–सुरेश सांगवान’सरु’

सामने ये मेरे मंज़र नहीं होता
तू बसा गर दिल के अंदर नहीं होता

सुरेश सांगवान’सरु’

बे-क़रारी शोर मचा सकती है
आसमाँ सर पे उठा सकती है

रू-ब-रू हो मौत से इक बार तू  Read more

कितनी ही ना जाने शाखों में बटी हूँ
पत्नी हूँ माँ हूँ बहन और बेटी हूँ

–सुरेश सांगवान’सरु’

बोझ समझकर हाय उतार देते हैं
बेटी को कहाँ लोग प्यार देते हैं
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

अपनी जगह खुश हूँ तेरा बीमार नहीं हूँ
उलझूँ किसी दामन से मैं वो खार नहीं हूँ

—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more