हर बार थामती हूं आंसुओं का दामन, पलकों की कगारों पर
रूसवा न कर दें सब्र को मेरे, कहीं बाहर निकल कर….

आह को चाहिए इक उम्र, असर होने तक
कौन जीता है तिरी जुल्फ के सर होने तक

दामे हर मौज में है, Read more