रूह में ………….जो आइना होता है
रोशनी …………सच की दिखा देता है
—सुरेश सांगवान’सरु’

निकल पड़ता है घर से रोज़ दर्द-ए-दिल भुलाने को,
राह पकड़ता है बुतख़ाने की या जाता है मयख़ाने को।

मेरे माज़ी के मुझपे हैं कुछ एहसान बेशुमार,  Read more

चेहरों की धूप आँखों की गहराई ले गया|
आईना सारे शहर की बीनाई ले गया|

डूबे हुए जहाज़ पे क्या Read more