सुप्रभात

नये रिस्तों से बंधन, कुछ बेगाने हो गये,
अनजाने अपने हुए, अपने अनजाने हो गये।  Read more

आज मुद्दत बाद महफिल में शिरकत किया है कोई,
कि इस नाचीज पे रेहमत किया है कोई।

आज इतना खूबसूरत क्यों लगता है ताज,  Read more

रोज़ हौसलाअफजाई होती है,
रोज़ उनकी गली में रुसवाई होती है।
कैसे बताऊँ ज़माने वालों को,
कितनी शिद्दत से बुलवाई होती है।

जो चाहा मैंने अक्सर मुझे मिला नहीं
जरुर कुछ खोट मेरी शिद्दत में ही रहा होगा .