मुझे तूझसे कोई सिकवा नही
तेरे दरद को श्यारी बना दिया

मैंने भी अपने हारे मुकदर को
तेरी याद में जीत का सिकंदर बना दिया

-Nisha nik.

ऐ अन्ज़ान,
शिकवा तो यूँ करते हो जैसे तुम बस मेरे ही हो,
कभी खुद से पूँछों मेरे एल-एल.बी. करने का वजह क्या थी।

चले गये वो तो होश आया मुझे/
कई अनकहे शिकवे रखे रह गये//
आभा….

उन नादानियों के दौर से यूँ हम भी गुज़रे थे,
अब क्या बताये आपको कि कैसे बिखरे थे,

शिकवे शिकायत रूठना रोज़ की बात रही,  Read more

उन नादानियों के दौर से यूँ हम भी गुज़रे थे,
अब क्या बताये आपको कि कैसे बिखरे थे,

शिकवे शिकायत रूठना रोज़ की बात रही,  Read more

देखना मैं एक दिन चली जाउंगी
तुम्हारे लिए लफ्ज़ छोड़ जाउंगी
जो गिले शिकवे है आज कर लो
कल बहुत दूर निकल जाउंगी….
आभा….