#G3

कौन कहता है ख़ामोशी बदग़ुमां है,
ज़रा ग़ौर से सुनिये इसकी अपनी ज़ुबां है,  Read more

शाम जैसे-जैसे सहर को ढ़लती गई,
हसरत की आंधी दिल में मचलती गई।
वो आएं न आएं मुकर्रर उनको करना है,
अपनी तो हर रात तसव्वुर में ही पलती गई।

खुशी मुझे इतनी की बसर हो जाय,
उन्हें महल से घर में एहतमाम की चिंता थी।

हम मिल बांट के गुजर करते हैं अब भी,  Read more

शाम ढली हम घर चले
दिन भर मस्ती कर चले

रातें लाई घर हमें  Read more

वो नन्हा सा इक पल जाने
कैसे छल गया मुझको
लाख बचाया लाख सम्हाला  Read more

इश्क़ में हमारी बे-ज़ुबानी देखते जाओ
उस पर आलम की तर्जुमानी देखते जाओ

तुम ना आओगे कभी मुन्तज़िर हम फिर भी हैं  Read more

पास आने नहीं देते
मुस्कुराने नहीं देते

बोझ ज़िम्मेदारियों के Read more

वो हंसी शाम जो उधार है तुम्हारी मुझ पर
फक़त उसके सहारे सदियां गुज़ार आये..
आभा…

रफ़्ता रफ़्ता तुझसे वाबस्ता हो रहें हैं
जाने क्या मिल रहा है जाने क्या खो रहे हैं

तुझसे मिले हैं जब से दो आलम का है ये दिल  Read more

शाम होते ही तुम अपना गम भूलने की कोशिश करोगे,
और हम शाम के बाद तेरी यादों के जश्न से घिर जायेंगे…
आभा..

गए ज़माना हुआ तुझे,
ऐ मेरे लख्त-ए-जिगर,
आ भी जा अब लौट कर,  Read more

बेचैनियों  को  दिल  की  पैग़ाम  कोई  तो  दे
मेरी  निकहतों  को  दिलबर काम कोई तो दे

हवा महकते गुलाब की या ख़ला  ही कर अता  Read more

निःशब्द शान्ति का आवरण ओढ़े ज़िन्दगी, तलाशती है अपने अतीत को,
दूर बहुत दूर जाती है पीछे, एक झलक देखने अपने आप को ||

ज़िन्दगी ने देखा, उसपर धूल जमी थी, पर घाव हरा था,  Read more

एक अनजाना सा भय है आज मेरे मन में,
अपनी मंजिल की डगर में कि अगले पल क्या होगा |

जवाब ढूँढता हूँ मैं, इन वीरान राहों में,  Read more

मेरी सुबह तुम, मेरी शाम तुम,
मेरी जिंदगी तमाम तुम,

सब कुछ मेरा अब तुझसे ही,
मेरी ख़ास तुम मेरी आम तुम,  Read more

तुम्हे जब कभी मिले फुर्सत मेरे दिल से बोझ उतर दो,
मैं बहुत दिनों से उदास हूँ मुझे इक शाम तो उधार दो…

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

इक टहनी पर चाँद टिका था Read more

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