ऐ अन्ज़ान बाबू,
जो खुद बदनाम है आज़मगढ़ शहर में,
वो… अब हमें बताता है जीने का तरीका।

जरा बारिश क्या हुई मेरे शहर में
के तेरी यादें बिखर गयी सावन की तरह ।

ऐ अन्ज़ान,
मै जो देखता हूँ, वो ही बोलने का आदी हूँ,
मै अपने आज़मगढ़ शहर का सबसे बड़ा फ़सादी हूँ…

ऐ अन्ज़ान,
हम फिर आयेंगें तुम्हारे लखनऊ शहर,
अभी तो हमें और जलील होना बाकी है।

बस्तियां, महल, नगर उजड़ जाते हैं,
बसे बसाये मंज़र, उजड़ जाते हैं।
कुदरत के आगे जोर कहां चलता है,  Read more

अपना ही शहर आज मुझे बेगाना क्यूँ लगा
मेरी ग़रीबी की हक़ीक़त अफ़साना क्यूँ लगा

प्यार सदा से था इसमें दिल ही ऐसा पाया है  Read more

ऐ अन्ज़ान,
हम ना होंगे इस लखनऊ शहर में तो कौन मनायेगा तुम्हें,
ये बुरी बात है हर बात पर रुठा ना करों।

उस जगह की पहले सी क्यों, शामो-सहर नहीं है,
क्यों तेरा शहर मेरा शहर नहीं है।

जब भी आया यहां मेहमान की तरह, Read more

अंधेरों को हमसफ़र किया जाये
नज़रों को यूँ तेज़तर किया जाये

निकले हुए हैं तीर ज़माने भर से  Read more

यूँ लगने लगी है अब जहर जिंदगी,
तड़पा रही है कुछ इस कदर जिंदगी,

यंहा उजालों के पीछे अँधेरा है बहुत, Read more

पुराने शहरों के मंज़र निकलने लगते हैं
ज़मीं जहाँ भी खुले घर निकलने लगते हैं

मैं खोलता हूँ सदफ़ मोतियों के चक्कर में  Read more

ऐ अन्ज़ान,
तुम्हारा भी कुछ कसूर है इस मेरी आवारगी में,
कि तुम्हारी याद जब आती है तो ये आज़मगढ़ शहर अच्छा नही लगता।

मैं कब कहता हूँ वो अच्छा बहुत है
मगर उसने मुझे चाहा बहुत है

खुदा इस शहर को महफूज़ रखे  Read more

परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता
किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता

बडे लोगों से मिलने में हमेशा फ़ासला रखना  Read more

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं
जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी-चादर उठाते हैं

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब काँधा नहीं देते Read more

यही है इल्म मिरा यही हुनर भी है
नहीं फसील-ए-अना यही गुज़र भी है

बसी है कहाँ इंसानियत जानूं हूँ  Read more

ऐ अन्ज़ान,
मेरी गलतियाँ,
मेरी कमियां,
मेरे सारे दोष,
अनदेखा कर देना।
क्योंकि मैं जिस शहर में रहता हूं,
उसे लोग आज़मगढ़ कहते हैं।

दूर जाने से पहले, मेरी जिंदगानी ले जा,
तू मेरे नादाँ दिल से, थोड़ी नादानी ले जा,

कैसे बताओगे सबको, जुदाई का सबब तुम,  Read more

अय हमसुखन वफ़ा का तक़ाज़ा है अब यही
मैं छोड़ दूं तेरा शहर जो तू कहे गली

क्यूंकर यकीन आये मुहब्बत का हमनशीं  Read more

फूलों के शहर में घुमाता है कोई
रह-रह के हाय याद आता है कोई