आँखो में मेरे शराब है
पुरा बदन शब्ब है
अगर चाहत हो हुजूर को होठो से जाम चकने की
मयखाना -ए -शब्ब तैयार है।

हाथो मे शराब बदलती रहती है,
नशे का असर वही रहता है….
कमबख्त तसवीरें बदलती रहती है
पर कत्ल करने का अन्दाज़ वो ही रहता है …