ऐ अन्ज़ान,
शिकवा तो यूँ करते हो जैसे तुम बस मेरे ही हो,
कभी खुद से पूँछों मेरे एल-एल.बी. करने का वजह क्या थी।

आज तक सब खोया ही खोया था, बस एक तुम्ही को पाया है
और तुम भी अलविदा कह गये ये कहकर की छोड़ो सब मोह माया है
तुम क्या जानो क्या हालत हो गई है इस दिल की,
जो पूरी रात तुम्हारी याद मे रोया है।
ना मिलता है सुबह शुभ दिन का संदेश तुम्हारा ना रात में तुम्हारे ख्वाबों का साया है
आखिर ऐसी क्या वजह है जो तुम्हें ये लगने लगा की सब मोह माया हैं।

ऐ अन्ज़ान,
लोग पूँछने लगे हैं मुझसे मेरे मुस्कुराने की वजह,
अगर हो इजाज़त तो तुम्हारा नाम बता दूँ।