जब उदास होते थे तो कोई बात भी नहीं करता था
आज जब मुस्कुराते है तो लोग वजह पूछ लेते हैं।

कुछ आगो-चिंगारी खाक़ मिरी से माँगते हैं
ये लोग पानी भी सूखी नदी से माँगते हैं
–सुरेश सांगवान’सॅरू’

लोग आजकल के बड़े होशियार हो गये
ये मत समझना तेरे तरफ़दार हो गये

—-सुरेश सांगवान’सरु’

मेरे बद हालात पर हँसने लगे है लोग,
ताने भी कैसे-कैसे अब कसने लगे है लोग।

समझ रहा था जिन चेहरों को अपना मैं,
उन चेहरों में अब पराये बसने लगे है लोग।
-इन्दर गुन्नासवाला

ऐ अन्ज़ान,
खुशबू जैसे लोग है हम,
बस बिखरें-बिखरें रहतें है।

ऐ अन्ज़ान,
लोग पूँछने लगे हैं मुझसे मेरे मुस्कुराने की वजह,
अगर हो इजाज़त तो तुम्हारा नाम बता दूँ।