एक पल के लिए बनाने वाला भी रोया होगा,
किसी का अरमान जब यूँ मौत की नींद सोया होगा।
हाँथों की मेहँदी छूटी भी नहीं कि चूड़ियाँ तोड़नी पड़ी,
कौन है जो ये लम्हा देखकर न रोया होगा।

यादों की कतरन जोड़ कर मैं आंचल बुन रही हूं
वक्त का रेशम धागा लेकर इक इक लम्हा चुन रही हूं
आभा..

याद आऊं चले आना, लम्हा वहीं थमा है//
जिस मोड़ पर तुमने, अकेला कर दिया है//
आभा…