उस जगह की पहले सी क्यों, शामो-सहर नहीं है,
क्यों तेरा शहर मेरा शहर नहीं है।

जब भी आया यहां मेहमान की तरह, Read more

तलाश जिसकी रही हाथ वो ख़बर आई
आँखें बंद जब हुई रोशनी नज़र आई
–सुरेश सांगवान’सरु’

माँ रोते में मुस्कुराना तुमसे सीखा है
कारे दुनियाँ का ताना-बाना तुमसे सीखा है

गर्दिश-ए-दौरा तो आनी जानी शै  Read more

ख़ुदाया प्यार में यूँ बंदगी अच्छी लगी
रही मैं ना मैं मुझे बेखुदी अच्छी लगी

खलाएँ जीस्त की मेरी तमाम भर गई  Read more

रूह में ………….जो आइना होता है
रोशनी …………सच की दिखा देता है
—सुरेश सांगवान’सरु’

खाली कागज़ पे क्या तलाश करते हो?
एक ख़ामोश-सा जवाब तो है।

डाक से आया है तो कुछ कहा होगा  Read more

ये  मोहब्बत  है पनाह  में  नहीं रहती
बहुत देर  ख़ुश्बू गुलाब में  नहीं  रहती

बिखर जाती हूँ कागज पर बन के मोती  Read more

तूने खतों में जो रोशनाई इस्तेमाल की
वो आज तक मेरे दिल में चमकती है….
आभा..