हर बार थामती हूं आंसुओं का दामन, पलकों की कगारों पर
रूसवा न कर दें सब्र को मेरे, कहीं बाहर निकल कर….

सबको रुसवा बारी-बारी किया करो
हर मौसम में फ़त्वे जारी किया करो

रातों का नींदों से रिश्ता Read more