भारत का किसान आज भी परेशान
ना कोई पहचान ना कुछ सम्मान

भारत के रीढ़ में क्यूँ है पीड़ Read more

आज मुद्दत बाद महफिल में शिरकत किया है कोई,
कि इस नाचीज पे रेहमत किया है कोई।

आज इतना खूबसूरत क्यों लगता है ताज,  Read more

रूठ जाये अगर तक़दीर तो मनाकर देखो
फूल मेहनत के हथेली पर उगाकर देखो

—–सुरेश सांगवान’सरु’

बहुत समय पहले की बात है ,किसी गाँव में एक किसान रहता था . वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था . इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था , जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था . उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था ,और दूसरा एक दम सही था . इस वजह से रोज़ घर पहुँचते -पहुचते किसान Read more