जब उदास होते थे तो कोई बात भी नहीं करता था
आज जब मुस्कुराते है तो लोग वजह पूछ लेते हैं।

दर्द लाख सही बेदर्द ज़माने में
मगर जाता भी क्या है मुस्कुराने में

सुरेश सांगवान ‘सरु

नजदीकियां तो हम भी बढ़ा लेते उनसे…
पर एक तरफा इश्क़ के खुमार का, नशा ही कुछ ओर था …
मेरे अजीब दोस्तों का तुम्हें भाभी कह के बुलाना और Read more

ऐ अन्ज़ान,
लोग पूँछने लगे हैं मुझसे मेरे मुस्कुराने की वजह,
अगर हो इजाज़त तो तुम्हारा नाम बता दूँ।