भारत का किसान आज भी परेशान
ना कोई पहचान ना कुछ सम्मान

भारत के रीढ़ में क्यूँ है पीड़ Read more

बिना गाली-गलौज के उस बद्जबान को मेरा जवाब –

भारत माँ के जयकारे का,
तुझको है कोई ज्ञान नहीं।
तू फर्जों को भूल गया,  Read more

ऐ अन्ज़ान,
तुम्हारी यादों की मिट्टी में,
आज फिर उन जख्मी लम्हों को दफ़ना कर आया हूँ।

अभिमान अक्ल को खा जाता है-एक प्रेरणादायी कहानी…
एक घर के मुखिया को यह अभिमान हो गया कि उसके बिना उसके परिवार का काम नहीं चल सकता।
उसकी छोटी सी दुकान थी। उससे जो आय होती थी, उसी से उसके परिवार का गुजारा चलता था। Read more

मधुशाला भाग – 2 (हरिवंश राय बच्चन)
बड़े बड़े परिवार मिटें यों, एक न हो रोनेवाला,
हो जाएँ सुनसान महल वे, जहाँ थिरकतीं सुरबाला,
राज्य उलट जाएँ, भूपों की भाग्य सुलक्ष्मी सो जाए,  Read more

जो बीत गई सो बात गई…

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया  Read more

बहुत पानी बरसता है तो मिट्टी बैठ जाती है ,
न रोया कर बहुत रोने से छाती बैठ जाती है ,

यही मौसम था जब नंगे बदन छत पर टहलते थे, Read more

मेरी ख़्वाहिश है कि फिर से मैं फ़रिश्ता हो जाऊँ,
माँ से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊँ,

कम-से कम बच्चों के होठों की हंसी की ख़ातिर, Read more

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है,

रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ, Read more

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का ख़िलौना हैं
मिल जाये तो मिट्टी हैं खो जाये तो सोना है

अच्छा सा कोई Read more

मिट्टी के घरोंदे है, लहरों को भी आना है,
ख्बाबों की बस्ती है, एक दिन उजड़ जाना है,

टूटी हुई कश्ती है, Read more