रोज़ तेरा इंतजार करती हूं
रोज़ तेरा एतबार करती हूं
तू आ पाये या न आये पर
तिरी महक में डूबी रहती हूं
आभा चन्द्रा

तेरी यादों को सिरहाने लगा कर सोयी थी मैं,
जब जागी तो सारा ज़हन महक रहा था…
आभा….