मधुशाला भाग – 6 (हरिवंश राय बच्चन)

साकी, जब है पास तुम्हारे इतनी थोड़ी सी हाला,
क्यों पीने की अभिलाषा से, करते सबको मतवाला,
हम पिस पिसकर मरते हैं, तुम छिप छिपकर मुसकाते हो,  Read more

मधुशाला भाग – 5 (हरिवंश राय बच्चन)

ढलक रही है तन के घट से, संगिनी जब जीवन हाला,
पत्र गरल का ले जब अंतिम साकी है आनेवाला,
हाथ स्पर्श भूले प्याले का, स्वाद सुरा जीव्हा भूले   Read more

मधुशाला भाग – 3 (हरिवंश राय बच्चन)
वादक बन मधु का विक्रेता लाया सुर-सुमधुर-हाला,
रागिनियाँ बन साकी आई भरकर तारों का प्याला,
विक्रेता के संकेतों पर दौड़ लयों, आलापों में, Read more
मधुशाला भाग – 1 (हरिवंश राय बच्चन)
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,  Read more

जो बीत गई सो बात गई…

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया  Read more