बेटी बचाओ,बेटी पढा़ओ से प्रेरित मेरी रचना “बेटियाँ” के कुछ अंश….

********************बेटियाँ********************

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह,
पनपती आधार हैं। Read more

कितनी ही ना जाने शाखों में बटी हूँ
पत्नी हूँ माँ हूँ बहन और बेटी हूँ

–सुरेश सांगवान’सरु’

बोझ समझकर हाय उतार देते हैं
बेटी को कहाँ लोग प्यार देते हैं
—सुरेश सांगवान’सरु’  Read more

मिला जो हमें प्यार से, वो अपना सा लगा,
बिन मागें मिल गया सब,तो सपना सा लगा,

बिटिया विदा हुई घर से, रोया मै ज़ार ज़ार,  Read more

सिर पर भारी बोझ उठाये चलता है
जिससे सारे कुनबे का पेट पलता है

आंगन से बाहर नहीं निकल पाती  Read more