तड़ित की चमक-दमक में देखो,मेघों ने आवाज किया,
हल्की-फुल्की बूँदों से कैसे, बारिश का आगाज किया।
देखो बेल हुई मतवाली ,कुँन्जें सारी मदहोश हुई,
उपवन ने भी अपने रुख का मधुशाला अंदाज किया।

जरा बारिश क्या हुई मेरे शहर में
के तेरी यादें बिखर गयी सावन की तरह ।

तड़ित की चमक-दमक में देखो, मेघों ने आवाज किया,
हल्की-फुल्की बूँदों से कैसे, बारिश का आगाज किया।
देखो बेल हुई मतवालों, कुँन्जें सारी मदहोश हुई,
उपवन ने भी अपने रुख का मधुशाला अंदाज किया।