रख दे अब तू भी वहम का बादल निकाल के
क्या रख दूं तेरे सामने मैं दिल निकाल के

निकाल तो डाला मुझे महफ़िल से कई बार  Read more

कोलाहल मन के भीतर, अंतर्मन व्याकुल,
भयाक्रांत सब दिशायें, हलचल प्रतिपल|

स्वर्णिम दिवस हरित रात्रि,कहाँ ग़ुम हुई?,  Read more

प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं

बेरुख़ी इससे बड़ी और भला क्या होगी Read more

साये उतरे, पंछी लौटे , बादल भी छुपने वाला है
लेकिन मैं वो टूटा तारा, जो घर से जाने वाला है

फिर सुबह हुई आँखें खोलें , Read more