एक दौर
जहाँ सिर्फ प्रगति की
विकास की बातें होनी थी
अत्याचार, भ्रष्टाचार के खिलाफ  Read more

छोटी-छोटी बातों पर
गतिरोधी घटनाएँ
और उन पर फिर सियासत  Read more

बातें दिल की हैं हर किसी से कह नहीं सकता
मैं एक क़तरा हूं तनहा तो बह नहीं सकता

सुरेश सांगवान ‘सरु ‘  Read more

जश्न मना काफ़िर जरा, आज मौका ख़ुशी का है,
जला है घर मेरा अभी, ये नज़ारा उसी का है,

बातें लिखी है वादों भरी, इन रद्दियो के ढेर में, Read more

वो जाते हुये प्यार में, निशानी दे गया,
इक उम्रभर को, आँख में पानी दे गया,

ज़माने से छुपाई थी, बातें मोहब्बत की,
वो ज़माने को सुनाने को, कहानी दे गया,
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मनोज सिंह”मन”

मुद्दतों जिसकी याद में आंख की नमी ना गयी
उसकी ही बातें आज हमें मतलबी ठहरा गयी…..
आभा….

इस जिन्दगी की बस एक ही कहानी है,
कंही ठहरा तो कंही बहता हुआ पानी है,

न जाने कोई राज़  बहते हुये अश्कों का,  Read more

तुम क्या जानो ए साहिबा के कितना प्यार तुमसे करते है
दीदार पाने को तुम्हारा हर दिन हम दुआएं हजार करते है
क्यू तुम हमसे यू रूठे रूठे रहते हो  Read more

ऐ अन्ज़ान,
तुम दूर हो मुझसे, मै इतना परेशान नही होता।
पर किसी और के इतना पास हो, बात तो यह बर्दाश्त नही होती?

ऐ अन्ज़ान,
कभी लफ्ज़ भूल जाऊं, तो कभी बात भूल जाऊं,
तुमको इस कदर चाहूँ कि अपनी ज़ात भूल जाऊं,
उठ के तेरे पास से जब जाने लगूँ मै,
जाते हुए खुद को मै तुम्हारे पास भूल जाऊं।

ऐ अन्ज़ान ईश्क़ कर लो, “बेइंतिहा” इन कानून की किताबों से..
बस एक यही हैं… जो अपनी बातों से कभी नही पलटेंगीं!

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी Read more

तुम्हारी आवाज़ के लहज़े से
पढ़ती थी तुमको इसीलिए
तुमने अब मुझसे बात करना
बंद कर दिया शायद……
आभा….

बात कुछ यूँ हो रही है,
कि रोज़ इक ग़ज़ल हो रही है ।

उसकी मेहरबानियाँ यूँ मुझपर, Read more

जो बीत गई सो बात गई…

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया  Read more

आज से अब से  कोई  गीत  ऐसा  गाएँ  हम
चाहे गम मिले या खुशियां बस  मुस्कुराएँ हम

जब हदें  नहीं  कोई खुले इन आसमानों की Read more

ज़बरन  ही  हामी  भराई  गई  थी
शादी   के  मंडप  बिठाई  गई  थी

अजीब सी हालत थी दिल की मगर  Read more

जो अधूरी रह गयी थी वो कहानी सोचना,
कभी बैठकर तन्हा अपनी बातें पुरानी सोचना…

रात की कालिख जब उफ़ान पर होती है
तेरी बाहों के चिरागों से तब सहर होती है

रोती है बहुत तब कोई नादान चकोरी Read more

जाने क्या बात हुई कुछ दूरियों का सा गुमान है
मेरे महबूब तेरी हर अदा तेरे मौसम का पता देती है